शोषण की शृंखला के हेतु बनती जो शांति, युद्ध है, यथार्थ में, व' भीषण अशांति है; सहना उसे हो मौन, हार मनुजत्व की है, ईश की अवज्ञा घोर, पौरुष की श्रांति है; पातक मनुष्य का है, मरण मनुष्यता का, ऐसी शृंखला में धर्म विप्लव है, क्रांति है।
(UPSC 2020, 10 Marks, )
शोषण की शृंखला के हेतु बनती जो शांति, युद्ध है, यथार्थ में, व' भीषण अशांति है; सहना उसे हो मौन, हार मनुजत्व की है, ईश की अवज्ञा घोर, पौरुष की श्रांति है; पातक मनुष्य का है, मरण मनुष्यता का, ऐसी शृंखला में धर्म विप्लव है, क्रांति है।
शोषण की शृंखला के हेतु बनती जो शांति, युद्ध है, यथार्थ में, व' भीषण अशांति है; सहना उसे हो मौन, हार मनुजत्व की है, ईश की अवज्ञा घोर, पौरुष की श्रांति है; पातक मनुष्य का है, मरण मनुष्यता का, ऐसी शृंखला में धर्म विप्लव है, क्रांति है।
(UPSC 2020, 10 Marks, )