“शुक्ल जी निबंध में विषय की गम्भीरता को अन्तर्भेदी दृष्टि से देखते हैं; साथ ही उनमें गंभीर मर्यादित आत्म-व्यंजना भी है।” इस संदर्भ को ध्यान में रखकर शुक्ल जी के विचारात्मक निबंधों की समीक्षा कीजिए। (UPSC 1981, 55 Marks, )

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