चढ़ा अषाढ़ गगन घन गाजा। साजा बिरह दुंद दल बाजा। घूम स्याम घौरे घन धाए। सेत धुजा बगु पाँति देखाए। खरग बीज चमके चहुँ ओस बुंद बान बरिसे घनघोरा। अद्रा लाग बीज भुई लेई। मोहि प्रिय बिनु को आदर देई। (UPSC 2005, 20 Marks, )

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