“इस पुस्तक में मेरी अंतर्यात्रा में पड़ने वाले कुछ प्रदेश हैं। यात्रा के लिए निकलती रही है बुद्धि, पर हृदय को भी साथ लेकर।” — लेखक के इस कथन के परिप्रेक्ष्य में ‘चिन्तामणि’ के निबंधों की आलोचना कीजिए। (UPSC 1980, 55 Marks, )

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