जग हठवाड़ा स्वाद ठग, माया बेसाँ लाई। रामचरन नीका गही, जिनि जाइ जनम ठगाइ॥ कबीर माया मोहनी, जैसी मीठी खाँड़। सतगुरु कृपा भई, नहीं तो करती भाँड़॥ (UPSC 2023, 10 Marks, )

जग हठवाड़ा स्वाद ठग, माया बेसाँ लाई। रामचरन नीका गही, जिनि जाइ जनम ठगाइ॥ कबीर माया मोहनी, जैसी मीठी खाँड़। सतगुरु कृपा भई, नहीं तो करती भाँड़॥