अतरजामिहु तें बढ़ बाहरजामि हैं राम; जे नाम लिये हैं। धावत धेनु पन्हाई लवाई ज्यों बालक बोलनि कान किये तें। आपनि बुझि कहैं 'तुलसो’, कहिये की न बावरी बात दिये तें। बैज परे प्रह्लादहु को प्रगटे प्रभु पाहन तें न हियें तें ॥ (UPSC 1989, 20 Marks, )

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