रामचंद्र शुक्ल
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भाव या मनोविकार क्या हैं? रामचन्द्र शुक्ल ने उनका वर्गीकरण किस रूप में किया है? 'चिन्तामणि' में संगृहीत भाव या मनोविकार से सम्बन्धित निबंधों की विशेषताओं का वर्णन कीजिए। (UPSC 1999, 55 Marks, )
भाव या मनोविकार क्या हैं? रामचन्द्र शुक्ल ने उनका वर्गीकरण किस रूप में किया है? 'चिन्तामणि' में संगृहीत भाव या मनोविकार से सम्बन्धित निबंधों की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।Enroll Now
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“निबंध-लेखन में आचार्य शुक्ल ने एक साहित्यकार के रूप में ही भावों अथवा मनोविकारों पर विचार किया है, मनोवैज्ञानिक के रूप में नहीं।” — इस कथन के विषय में तर्क प्रस्तुत कीजिए। (UPSC 1998, 55 Marks, )
“निबंध-लेखन में आचार्य शुक्ल ने एक साहित्यकार के रूप में ही भावों अथवा मनोविकारों पर विचार किया है, मनोवैज्ञानिक के रूप में नहीं।” — इस कथन के विषय में तर्क प्रस्तुत कीजिए।Enroll Now
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“आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के निबंधों में भावों की भव्यता है, अभिव्यंजना प्रणाली की नव्यता है, विचारों की तीव्रता है, संस्कृति की सशक्त अभिव्यक्ति है और संतुलन की आमोद शक्ति है।” — इस कथन का संपरीक्षण कीजिए। (UPSC 1997, 55 Marks, )
“आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के निबंधों में भावों की भव्यता है, अभिव्यंजना प्रणाली की नव्यता है, विचारों की तीव्रता है, संस्कृति की सशक्त अभिव्यक्ति है और संतुलन की आमोद शक्ति है।” — इस कथन का संपरीक्षण कीजिए।Enroll Now
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निबंध "उन्मुक्त चिंतन है”, "मन की मुक्त भटकन है” – जैसी अवधारणा को शुक्लजी के निबंध प्रमाणित करते हैं या अप्रमाणित? — सोपपत्ति अपना मंतव्य प्रस्तुत कीजिए। (UPSC 1996, 55 Marks, )
निबंध "उन्मुक्त चिंतन है”, "मन की मुक्त भटकन है” – जैसी अवधारणा को शुक्लजी के निबंध प्रमाणित करते हैं या अप्रमाणित? — सोपपत्ति अपना मंतव्य प्रस्तुत कीजिए।Enroll Now
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“आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने उच्चकोटि के विचारात्मक निबंधों की रचना की है, जिनमें चिन्तन की मौलिकता, विवेचन की गम्भीरता, विश्लेषण की सूक्ष्मता एवं शैली की प्रौढ़ता दृष्टिगोचर होती है।” “चिंतामणि” के निबंधों के आधार पर इसकी सोदाहरण पुष्टि कीजिए। (UPSC 1993, 55 Marks, )
“आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने उच्चकोटि के विचारात्मक निबंधों की रचना की है, जिनमें चिन्तन की मौलिकता, विवेचन की गम्भीरता, विश्लेषण की सूक्ष्मता एवं शैली की प्रौढ़ता दृष्टिगोचर होती है।” “चिंतामणि” के निबंधों के आधार पर इसकी सोदाहरण पुष्टि कीजिए।Enroll Now
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आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के निबंधों को आप विषय प्रधान मानते हैं या व्यक्ति प्रधान? ‘चिंतामणि भाग-I’ के पठित निबंधों के आधार पर अपने मत का तर्कसम्मत प्रतिपादन कीजिए। (UPSC 1992, 55 Marks, )
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल के निबंधों को आप विषय प्रधान मानते हैं या व्यक्ति प्रधान? ‘चिंतामणि भाग-I’ के पठित निबंधों के आधार पर अपने मत का तर्कसम्मत प्रतिपादन कीजिए।Enroll Now
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‘चिन्तामणि’ के निबंधों को आचार्य शुक्ल ने अपनी “अंतर्यात्रा में पड़ने वाले कुछ प्रदेश” कहा है, जिनमें यात्रा के लिए बुद्धि हृदय को साथ लेकर निकलती रही है। इस कथन के प्रकाश में उनके किसी एक निबंध का सोदाहरण विवेचन कीजिए। (UPSC 1987, 55 Marks, )
‘चिन्तामणि’ के निबंधों को आचार्य शुक्ल ने अपनी “अंतर्यात्रा में पड़ने वाले कुछ प्रदेश” कहा है, जिनमें यात्रा के लिए बुद्धि हृदय को साथ लेकर निकलती रही है। इस कथन के प्रकाश में उनके किसी एक निबंध का सोदाहरण विवेचन कीजिए।Enroll Now
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‘चिन्तामणि’ में संकलित रामचन्द्र शुक्ल के निबंध विषय-प्रधान हैं या व्यक्ति-प्रधान हैं? निर्धारित निबंधों के आधार पर युक्तियुक्त विवेचन कीजिए। (UPSC 1985, 55 Marks, )
‘चिन्तामणि’ में संकलित रामचन्द्र शुक्ल के निबंध विषय-प्रधान हैं या व्यक्ति-प्रधान हैं? निर्धारित निबंधों के आधार पर युक्तियुक्त विवेचन कीजिए।Enroll Now
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रामचन्द्र शुक्ल के निबंधों को सामने रखकर स्वयं उन्हीं के इस कथन की समीक्षा कीजिए कि “यदि गद्य कवियों या लेखकों की कसोटी है तो निबंध-गद्य की कसौटी है।” (UPSC 1982, 55 Marks, )
रामचन्द्र शुक्ल के निबंधों को सामने रखकर स्वयं उन्हीं के इस कथन की समीक्षा कीजिए कि “यदि गद्य कवियों या लेखकों की कसोटी है तो निबंध-गद्य की कसौटी है।”Enroll Now
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“शुक्ल जी निबंध में विषय की गम्भीरता को अन्तर्भेदी दृष्टि से देखते हैं; साथ ही उनमें गंभीर मर्यादित आत्म-व्यंजना भी है।” इस संदर्भ को ध्यान में रखकर शुक्ल जी के विचारात्मक निबंधों की समीक्षा कीजिए। (UPSC 1981, 55 Marks, )
“शुक्ल जी निबंध में विषय की गम्भीरता को अन्तर्भेदी दृष्टि से देखते हैं; साथ ही उनमें गंभीर मर्यादित आत्म-व्यंजना भी है।” इस संदर्भ को ध्यान में रखकर शुक्ल जी के विचारात्मक निबंधों की समीक्षा कीजिए।Enroll Now
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“इस पुस्तक में मेरी अंतर्यात्रा में पड़ने वाले कुछ प्रदेश हैं। यात्रा के लिए निकलती रही है बुद्धि, पर हृदय को भी साथ लेकर।” — लेखक के इस कथन के परिप्रेक्ष्य में ‘चिन्तामणि’ के निबंधों की आलोचना कीजिए। (UPSC 1980, 55 Marks, )
“इस पुस्तक में मेरी अंतर्यात्रा में पड़ने वाले कुछ प्रदेश हैं। यात्रा के लिए निकलती रही है बुद्धि, पर हृदय को भी साथ लेकर।” — लेखक के इस कथन के परिप्रेक्ष्य में ‘चिन्तामणि’ के निबंधों की आलोचना कीजिए।Enroll Now