तुलसीदास
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'रामचरितमानस' के बाद “कामायनी” एक ऐसा प्रबंध काव्य है जो मनुष्य के सम्पूर्ण प्रश्नों का अपने ढंग से कोई न कोई सम्पूर्ण उत्तर देता है। विचार कीजिए। (UPSC 2015, 15 Marks, )
'रामचरितमानस' के बाद “कामायनी” एक ऐसा प्रबंध काव्य है जो मनुष्य के सम्पूर्ण प्रश्नों का अपने ढंग से कोई न कोई सम्पूर्ण उत्तर देता है। विचार कीजिए।Answer
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जो केवल अपने विलास या शरीर सुख की सामग्री ही प्रकृति में ढूंढ़ा करते हैं उनमें उस रागात्मक “सत्त्व” की कमी है जो व्यक्त सत्ता मात्र के साथ एकता की अनुभूति में लीन करके हृदय के व्यापकत्व का आभास देता है। संपूर्ण सत्ताएँ एक ही परम सत्ता और संपूर्ण भाव एक ही परम भाव के अंतर्भूत हैं। अतः बुद्धि की क्रिया से हमारा ज्ञान जिस अद्वैत भूमि पर पहुंचता है उसी भूमि तक हमारा भावात्मक हृदय भी इस सत्त्व-रस के प्रभाव से पहुँचता है। इस प्रकार अंत में जाकर दोनों पक्षों की वृत्तियों का समन्वय हो जाता है। (UPSC 2006, 20 Marks, )
जो केवल अपने विलास या शरीर सुख की सामग्री ही प्रकृति में ढूंढ़ा करते हैं उनमें उस रागात्मक “सत्त्व” की कमी है जो व्यक्त सत्ता मात्र के साथ एकता की अनुभूति में लीन करके हृदय के व्यापकत्व का आभास देता है। संपूर्ण सत्ताएँ एक ही परम सत्ता और संपूर्ण भाव एक ही परम भाव के अंतर्भूत हैं। अतः बुद्धि की क्रिया से हमारा ज्ञान जिस अद्वैत भूमि पर पहुंचता है उसी भूमि तक हमारा भावात्मक हृदय भी इस सत्त्व-रस के प्रभाव से पहुँचता है। इस प्रकार अंत में जाकर दोनों पक्षों की वृत्तियों का समन्वय हो जाता है।Enroll Now
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“भ्रमरगीत के बहाने निर्गुणोपासना की धज्जियाँ उड़ाने में सूर ने कोई कसर नहीं छोड़ी है।” - इस कथन के संबंध में अपना मत प्रस्तुत कीजिए। (UPSC 1998, 55 Marks, )
“भ्रमरगीत के बहाने निर्गुणोपासना की धज्जियाँ उड़ाने में सूर ने कोई कसर नहीं छोड़ी है।” - इस कथन के संबंध में अपना मत प्रस्तुत कीजिए।Enroll Now
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“सुनु नृप जासु बिमुख पछिताहीं-जासु भजन बिनु जरनि न जाहीं। भयउ तुम्हार तनय सोइ स्वामी। रामु पुनीत प्रेम अनुगामी।” – को दृष्टिगत कर गोस्वामी जी के पक्ष को समर्थ ढंग से उद्घाटित कीजिए।। (UPSC 1997, 55 Marks, )
“सुनु नृप जासु बिमुख पछिताहीं-जासु भजन बिनु जरनि न जाहीं। भयउ तुम्हार तनय सोइ स्वामी। रामु पुनीत प्रेम अनुगामी।” – को दृष्टिगत कर गोस्वामी जी के पक्ष को समर्थ ढंग से उद्घाटित कीजिए।।Enroll Now
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आचार्य शुक्ल को तुलसी की भक्ति-पद्धति में रहस्यवादिता के राहित्य और कबीर की भक्ति में रहस्यवादिता के साहित्य की स्थिति क्यों माननी पड़ी? उनकी उपपत्तियों को प्रस्तुत कीजिए। (UPSC 1996, 55 Marks, )
आचार्य शुक्ल को तुलसी की भक्ति-पद्धति में रहस्यवादिता के राहित्य और कबीर की भक्ति में रहस्यवादिता के साहित्य की स्थिति क्यों माननी पड़ी? उनकी उपपत्तियों को प्रस्तुत कीजिए।Enroll Now
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‘अयोध्याकाण्ड’ में विविध मानवीय व्यापारों, संवेदनाओं, मनोवृतियों एवं चरितों का अनुभव चित्रण हुआ है। – इस कथन की सर्वकता पर प्रकाश डालिए। (UPSC 1989, 55 Marks, )
‘अयोध्याकाण्ड’ में विविध मानवीय व्यापारों, संवेदनाओं, मनोवृतियों एवं चरितों का अनुभव चित्रण हुआ है। – इस कथन की सर्वकता पर प्रकाश डालिए।Enroll Now
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‘रामचरितमानस’ को आधार बनाकर तुलसीदास के समाज-दर्शन का निरूपण कीजिए और बताइए कि यह किस प्रकार भारतीय संस्कृति का प्रामाणिक चित्रण है। (UPSC 1980, 55 Marks, )
‘रामचरितमानस’ को आधार बनाकर तुलसीदास के समाज-दर्शन का निरूपण कीजिए और बताइए कि यह किस प्रकार भारतीय संस्कृति का प्रामाणिक चित्रण है।Enroll Now