सूरदास
"विश्व की विभूति में मन को रमाने का जैसा अवसर भक्ति भावना में है; वैसा अन्तःसाध्या में नहीं" — सूरदास कृत 'भ्रमरगीत' के आधार पर इस कथन की युक्तिसंगत समीक्षा कीजिए। (UPSC 2025, 15 Marks, )
"विश्व की विभूति में मन को रमाने का जैसा अवसर भक्ति भावना में है; वैसा अन्तःसाध्या में नहीं" — सूरदास कृत 'भ्रमरगीत' के आधार पर इस कथन की युक्तिसंगत समीक्षा कीजिए।Answer
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“काव्य, जीवन को अर्थवत्ता प्रदान करता है और काव्य की अर्थवत्ता बिम्ब से निर्मित होती है।” इस कथन के आलोक में सूरदास के काव्य का मूल्यांकन कीजिए। (UPSC 2017, 15 Marks, )
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'भ्रमरगीत' व्रजांगनाओं की वचनवक्रता, तन्मयता, संवाद-शैली आदि की दृष्टि से हिन्दी-साहित्य में विशेष स्थान रखता है — तर्क और प्रमाण सहित विवेचना कीजिए। (UPSC 1997, 55 Marks, )
'भ्रमरगीत' व्रजांगनाओं की वचनवक्रता, तन्मयता, संवाद-शैली आदि की दृष्टि से हिन्दी-साहित्य में विशेष स्थान रखता है — तर्क और प्रमाण सहित विवेचना कीजिए।Enroll Now
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सूरदास के 'भ्रमरगीत' में वचन की भावप्रेरित वक्ता द्वारा प्रेम-प्रसूत अंतर्वृत्तियों का उद्घाटन – 'भ्रमरगीतसार' के आधार पर मीमांसा कीजिए। (UPSC 1989, 55 Marks, )
सूरदास के 'भ्रमरगीत' में वचन की भावप्रेरित वक्ता द्वारा प्रेम-प्रसूत अंतर्वृत्तियों का उद्घाटन – 'भ्रमरगीतसार' के आधार पर मीमांसा कीजिए।Enroll Now
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“प्रेम नाम की मनोवृत्ति का जैसा विस्तृत और पूर्ण परिज्ञान सूर को था, वैसा और किसी कवि को नहीं” – 'भ्रमरगीतसार' के आधार पर विचार कीजिए। (UPSC 1987, 55 Marks, )
“प्रेम नाम की मनोवृत्ति का जैसा विस्तृत और पूर्ण परिज्ञान सूर को था, वैसा और किसी कवि को नहीं” – 'भ्रमरगीतसार' के आधार पर विचार कीजिए।Enroll Now