जयशंकर प्रसाद
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'रामचरितमानस' के बाद “कामायनी' एक ऐसा प्रबंध काव्य है जो मनुष्य के सम्पूर्ण प्रश्नों का अपने ढंग से कोई न कोई सम्पूर्ण उत्तर देता है। विचार कीजिए। (UPSC 2015, 15 Marks, )
'रामचरितमानस' के बाद “कामायनी' एक ऐसा प्रबंध काव्य है जो मनुष्य के सम्पूर्ण प्रश्नों का अपने ढंग से कोई न कोई सम्पूर्ण उत्तर देता है। विचार कीजिए।Answer
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“शरीर नश्वर और अस्थायी है? देवी अमरता चाहती हो? … उस संसार में क्या सुख और आकर्षण होगा?” – इस संवाद के माध्यम से कामायनी की विचारधारा स्पष्ट कीजिए। (UPSC 2006, 20 Marks, )
“शरीर नश्वर और अस्थायी है? देवी अमरता चाहती हो? … उस संसार में क्या सुख और आकर्षण होगा?” – इस संवाद के माध्यम से कामायनी की विचारधारा स्पष्ट कीजिए।Enroll Now
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ध्वन्यात्मकता, लाक्षिणकता, उपचारवक्रता और अनुभूति की विवृति को छायावाद की विशेषता मानने वाले प्रसाद ने उसे 'कामायनी' में कैसा मूर्त किया है ? स्पष्ट कीजिए। (UPSC 1995, 55 Marks, )
ध्वन्यात्मकता, लाक्षिणकता, उपचारवक्रता और अनुभूति की विवृति को छायावाद की विशेषता मानने वाले प्रसाद ने उसे 'कामायनी' में कैसा मूर्त किया है ? स्पष्ट कीजिए।Enroll Now
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दिनकर जी ने ‘कामायनी’ को "दोष-रहित, दूषण-सहित" कहकर क्या कहना चाहा है -- संभावनाओं का आकलन करते हुए अपनी वैचारिक प्रतिक्रिया व्यक्त कीजिए। (UPSC 1994, 55 Marks, )
दिनकर जी ने ‘कामायनी’ को "दोष-रहित, दूषण-सहित" कहकर क्या कहना चाहा है -- संभावनाओं का आकलन करते हुए अपनी वैचारिक प्रतिक्रिया व्यक्त कीजिए।Enroll Now
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“प्रसाद ने प्रकृति के कोमल और प्रलयंकारी दोनों रूपों का चित्रण किया है।” - 'कामायनी' में प्रकृति-वर्णन की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए उपर्युक्त कथन की सार्थकता सिद्ध कीजिए। (UPSC 1993, 55 Marks, )
“प्रसाद ने प्रकृति के कोमल और प्रलयंकारी दोनों रूपों का चित्रण किया है।” - 'कामायनी' में प्रकृति-वर्णन की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए उपर्युक्त कथन की सार्थकता सिद्ध कीजिए।Enroll Now
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“गुप्त-कालीन प्रामाणिक इतिहास का अनुलेखन एवं कल्पनाधारित वस्तु-संयोजन ‘स्कंदगुप्त’ में परिलक्षित होते हैं।” इस कथन की सप्रमाण संपुष्टि कीजिए। (UPSC 2018, 20 Marks, )
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“जयशंकर प्रसाद के नाटकों के स्त्री-पात्र सदैव श्रेष्ठ रहे हैं।” इस कथन के आलोक में 'स्कंदगुप्त' में स्त्री-पात्र परिकल्पना की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए। (UPSC 2016, 15 Marks, )
“जयशंकर प्रसाद के नाटकों के स्त्री-पात्र सदैव श्रेष्ठ रहे हैं।” इस कथन के आलोक में 'स्कंदगुप्त' में स्त्री-पात्र परिकल्पना की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।Answer
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क्या इतिहास और कल्पना के सुंदर योग को प्रसाद की नाट्यकलागत विशेषताओं में सर्वोपरि विशेषता माना जा सकता है? ‘स्कंदगुप्त’ के संदर्भ में तर्कसम्मत विवेचन कीजिए। (UPSC 2006, 60 Marks, )
क्या इतिहास और कल्पना के सुंदर योग को प्रसाद की नाट्यकलागत विशेषताओं में सर्वोपरि विशेषता माना जा सकता है? ‘स्कंदगुप्त’ के संदर्भ में तर्कसम्मत विवेचन कीजिए।Enroll Now
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“प्रसाद के नाटकों के नारी पात्र पुरुष पात्रों की अपेक्षा अधिक प्रभावपूर्ण शक्तिशाली हैं।” ‘चन्द्रगुप्त’ नाटक के आधार पर इस कथन की समीक्षा कीजिए। (UPSC 1990, 55 Marks, )
“प्रसाद के नाटकों के नारी पात्र पुरुष पात्रों की अपेक्षा अधिक प्रभावपूर्ण शक्तिशाली हैं।” ‘चन्द्रगुप्त’ नाटक के आधार पर इस कथन की समीक्षा कीजिए।Enroll Now
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“चन्द्रगुप्त” नाटक में जहाँ एक ओर पात्रों को स्वतन्त्र अस्तित्व प्रदान किया गया है, वहीं उनके अंतर्द्वंद्व एवं बहिर्द्वंद्व के मर्म को भी उद्घाटित किया गया है।” इस उक्ति के सन्दर्भ में नाटक के प्रमुख पात्रों की चारित्रिक विशेषताओं का विवेचन कीजिए। (UPSC 1981, 55 Marks, )
“चन्द्रगुप्त” नाटक में जहाँ एक ओर पात्रों को स्वतन्त्र अस्तित्व प्रदान किया गया है, वहीं उनके अंतर्द्वंद्व एवं बहिर्द्वंद्व के मर्म को भी उद्घाटित किया गया है।” इस उक्ति के सन्दर्भ में नाटक के प्रमुख पात्रों की चारित्रिक विशेषताओं का विवेचन कीजिए।Enroll Now