घिर रहे थे घुँघराले बाल अंस अव लम्बित मुख के पास। नील घन- शावक से सुकुमार सुधा भरने को विधु के पास॥ और उस मुख पर वह मुसक्यान ! रक्त किसलय पर ले विश्राम अरुण की एक किरण अम्लान अधिक अलसाई हो अभिराम ! (UPSC 1986, 20 Marks, )

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