Explanation
● हलन्त्यम्
● सूत्रार्थः: "हलन्त्यम्" सूत्र के अनुसार, किसी शब्द के अंत में आने वाला हल् (व्यंजन) अन्त्य (अंतिम) होता है।
● उदाहरण: "रामः" में "म" हल् है और "ः" अन्त्य है।
● एचोऽयवायावः
● सूत्रार्थः: इस सूत्र के अनुसार, ए, ओ के स्थान पर अय्, आव् का प्रयोग होता है।
● उदाहरण: "देवः" का रूप "दयवः" हो जाता है।
● कालाध्वनोरत्यन्तसंयोगे
● सूत्रार्थः: जब काल (समय) और अध्व (मार्ग) का अत्यन्त संयोग होता है, तब विशेष नियम लागू होते हैं।
● उदाहरण: "सप्ताहः" (समय) और "पथः" (मार्ग) का संयोग।
● उपमितं व्याघ्रादिभिः सामान्याप्रयोगे
● सूत्रार्थः: जब किसी वस्तु की तुलना व्याघ्र (बाघ) आदि से की जाती है, तो सामान्य प्रयोग में विशेष नियम लागू होते हैं।
● उदाहरण: "सिंहवत्" (सिंह के समान) का प्रयोग।
● पञ्चमी भयेन
● सूत्रार्थः: जब भय (डर) का उल्लेख होता है, तो पञ्चमी विभक्ति का प्रयोग होता है।
● उदाहरण: "सिंहात् भयम्" (सिंह से डर)।
● सूत्रार्थः: "हलन्त्यम्" सूत्र के अनुसार, किसी शब्द के अंत में आने वाला हल् (व्यंजन) अन्त्य (अंतिम) होता है।
● उदाहरण: "रामः" में "म" हल् है और "ः" अन्त्य है।
● एचोऽयवायावः
● सूत्रार्थः: इस सूत्र के अनुसार, ए, ओ के स्थान पर अय्, आव् का प्रयोग होता है।
● उदाहरण: "देवः" का रूप "दयवः" हो जाता है।
● कालाध्वनोरत्यन्तसंयोगे
● सूत्रार्थः: जब काल (समय) और अध्व (मार्ग) का अत्यन्त संयोग होता है, तब विशेष नियम लागू होते हैं।
● उदाहरण: "सप्ताहः" (समय) और "पथः" (मार्ग) का संयोग।
● उपमितं व्याघ्रादिभिः सामान्याप्रयोगे
● सूत्रार्थः: जब किसी वस्तु की तुलना व्याघ्र (बाघ) आदि से की जाती है, तो सामान्य प्रयोग में विशेष नियम लागू होते हैं।
● उदाहरण: "सिंहवत्" (सिंह के समान) का प्रयोग।
● पञ्चमी भयेन
● सूत्रार्थः: जब भय (डर) का उल्लेख होता है, तो पञ्चमी विभक्ति का प्रयोग होता है।
● उदाहरण: "सिंहात् भयम्" (सिंह से डर)।