"हिमालय भूस्खलन के लिए अत्यधिक प्रवण हैं।" कारणों पर चर्चा करें और उपयुक्त शमन उपाय सुझाएं। (UPSC 2016,13 Marks,)

“The Himalayas are highly prone to landslides.” Discuss the causes and suggest suitable measures of mitigation.

प्रस्तावना

हिमालय, दुनिया की सबसे प्रमुख पर्वत श्रृंखलाओं में से एक, विभिन्न कारकों के कारण भूस्खलन के लिए अत्यधिक प्रवण हैं।

भूस्खलन (landslides) मिट्टी, चट्टान, या मलबे का ढलान के साथ नीचे की ओर गति है, जो अक्सर भारी वर्षा, भूकंप, या मानव गतिविधियों जैसे कारकों द्वारा प्रेरित होता है।

डीजे वर्नेस (DJ Varnes) ने भूस्खलनों के लिए एक वर्गीकरण प्रणाली विकसित की, जो उनके गति प्रकार पर आधारित है, और भूस्खलन प्रक्रियाओं और उनके संभावित प्रभावों को समझने की आवश्यकता पर जोर देती है।

Explanation

Causes of landslides in the Himalayas

1. भूवैज्ञानिक कारक:

  •  खड़ी ढलानें (Steep slopes): हिमालय में खड़ी ढलानें हैं, जो भूस्खलन की संभावना को बढ़ाती हैं।
  •  कमजोर चट्टान संरचनाएं (Weak rock formations): कमजोर चट्टानों, जैसे कि शेल और मिट्टी (clay), की उपस्थिति ढलानों को फिसलने के लिए अधिक संवेदनशील बनाती है।
  •  टेक्टोनिक गतिविधि (Tectonic activity): हिमालय एक भूकंपीय रूप से सक्रिय क्षेत्र में स्थित है, जिससे बार-बार भूकंप आते हैं जो भूस्खलन को ट्रिगर कर सकते हैं।

2. जलवायु कारक:

  •  भारी वर्षा (Heavy rainfall): हिमालय मानसून के मौसम के दौरान महत्वपूर्ण वर्षा प्राप्त करता है, जो मिट्टी को संतृप्त करता है और इसकी फिसलने की संवेदनशीलता को बढ़ाता है।
  •  हिम पिघलना (Snowmelt): गर्म महीनों के दौरान बर्फ का पिघलना मिट्टी को संतृप्त कर सकता है और भूस्खलन में योगदान कर सकता है।
  •  हिमनद वापसी (Glacial retreat): जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालय में ग्लेशियरों के पीछे हटने से वे ढीला मलबा छोड़ जाते हैं जो भूस्खलन को ट्रिगर कर सकता है।

3. मानव गतिविधियाँ:

  •  वनीकरण की कमी (Deforestation): कृषि, लकड़ी काटने या बुनियादी ढांचे के विकास के लिए जंगलों की कटाई मिट्टी की स्थिरता को कमजोर करती है, जिससे यह भूस्खलन के लिए अधिक प्रवण हो जाती है।
  •  निर्माण गतिविधियाँ (Construction activities): अनुचित निर्माण प्रथाएं, जैसे कि अपर्याप्त ढलान स्थिरीकरण या खुदाई, ढलानों को अस्थिर कर सकती हैं और भूस्खलन को ट्रिगर कर सकती हैं।
  •  मानवजनित सिद्धांत (Anthropogenic Theories) (Eckart Ehlers): भूस्खलन को प्रेरित करने में मानव गतिविधियों की भूमिका पर ध्यान केंद्रित करता है।
  •  खनन, खनिज उत्खनन और वनीकरण की कमी प्राकृतिक ढलानों को बाधित करते हैं, जिससे भूस्खलन की आवृत्ति बढ़ जाती है।
  •  शहरीकरण ढलानों पर तनाव जोड़ता है, विशेष रूप से बिना उचित भू-तकनीकी विश्लेषण के बुनियादी ढांचे के विकास के माध्यम से।
  •  उदाहरण: हिमालय, झारखंड और मेघालय के खनन क्षेत्रों में भूस्खलन।

Mitigation measures for landslides in the Himalayas

1. प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (Early warning systems):

  •  ढलान स्थिरता में परिवर्तन का पता लगाने और संवेदनशील समुदायों को समय पर चेतावनी देने के लिए निगरानी प्रणाली (monitoring systems) लागू करना।
  •  उपग्रह इमेजरी (satellite imagery), ग्राउंड-आधारित सेंसर (ground-based sensors), और मौसम पूर्वानुमान (weather forecasting) जैसी तकनीकों का उपयोग करके भूस्खलन-प्रवण क्षेत्रों की भविष्यवाणी करना।

2. ढलान स्थिरीकरण (Slope stabilization):

  •  ढलानों को मजबूत करने और मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए रिटेनिंग वॉल्स (retaining walls), टेरेसिंग (terracing), और तटबंधों (embankments) का निर्माण करना।
  •  ढलानों पर वनस्पति लगाना ताकि सतही बहाव को कम करके और मिट्टी को बांधकर स्थिरता बढ़ाई जा सके।

3. भूमि-उपयोग योजना और विनियमन (Land-use planning and regulation):

  •  भूस्खलन-प्रवण क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों पर सख्त नियम लागू करना ताकि आगे की अस्थिरता को रोका जा सके।
  •  भूमि-उपयोग योजना का मार्गदर्शन करने और उच्च-जोखिम वाले क्षेत्रों में मानव बस्तियों को रोकने के लिए भूस्खलन खतरे वाले क्षेत्रों की पहचान और मानचित्रण करना।

4. वनीकरण और पुनर्वनीकरण (Afforestation and reforestation):

  •  वनस्पति आवरण को बहाल करने और ढलानों की स्थिरता को मजबूत करने के लिए वनीकरण और पुनर्वनीकरण प्रयासों को बढ़ावा देना।
  •  गहरी जड़ वाले पेड़ और झाड़ियाँ लगाना जो मिट्टी को बांध सकते हैं और कटाव को कम कर सकते हैं।

5. जन जागरूकता और शिक्षा (Public awareness and education):

  •  स्थानीय समुदायों को भूस्खलन के खतरों और आवश्यक सावधानियों के बारे में शिक्षित करने के लिए जागरूकता अभियान चलाना।
  •  आपातकालीन प्रतिक्रिया और निकासी प्रक्रियाओं में स्थानीय अधिकारियों और निवासियों को प्रशिक्षण देना।

Case Studies

  •   Uttarakhand Landslides (2013): भारी वर्षा ने उत्तराखंड में बड़े पैमाने पर भूस्खलन (landslides) को प्रेरित किया, जिससे व्यापक विनाश और जनहानि हुई।
  •   Darjeeling Landslides (2017): लगातार वर्षा के कारण पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले में भूस्खलन (landslides) हुआ, जिससे सड़क अवरोध और दैनिक जीवन में बाधा उत्पन्न हुई।

निष्कर्ष

हिमालय भूस्खलन (landslides) के प्रति अपनी उच्च संवेदनशीलता के कारण महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करता है। उचित शमन उपायों (mitigation measures) को अपनाकर, हिमालय में भूस्खलन से जुड़े जोखिमों को कुछ हद तक कम किया जा सकता है।