"सार्वजनिक सेवक द्वारा कर्तव्य का निर्वहन न करना भ्रष्टाचार का एक रूप है". क्या आप इस दृष्टिकोण से सहमत हैं? अपने उत्तर को उचित ठहराएं (UPSC 2019,10 Marks,)

“Non-performance of duty by a public servant is a form of corruption”. Do you agree with this view? Justify your answer.

प्रस्तावना

भ्रष्टाचार एक व्यापक समस्या है जो सरकारों और सार्वजनिक संस्थानों के कार्य को कमजोर करती है।

कर्तव्य का गैर-प्रदर्शन (Non-performance of duty) एक सार्वजनिक सेवक द्वारा अपनी जिम्मेदारियों और दायित्वों को पूरा करने में विफलता को संदर्भित करता है।

यह विभिन्न रूपों में प्रकट हो सकता है, जैसे कि लापरवाही, अक्षमता, जानबूझकर देरी, या कर्तव्यों से जानबूझकर बचना।

मेरे विचार में: कर्तव्य का गैर-प्रदर्शन (Non-performance of duty) भ्रष्टाचार का एक रूप है।

कर्तव्य का गैर-प्रदर्शन (Non-performance of duty) में अपनी जिम्मेदारियों और दायित्वों को पूरा करने में विफलता शामिल है।

यह विश्वास का उल्लंघन और शक्ति का दुरुपयोग दर्शाता है, जो अन्य प्रकार के भ्रष्टाचार के समान है।

Explanation

Here is my justification:

1. भ्रष्टाचार की व्यापक अवधारणा:

भ्रष्टाचार में बेईमान या अनैतिक व्यवहारों की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल होती है, जिसमें रिश्वतखोरी, गबन, भाई-भतीजावाद और शक्ति का दुरुपयोग शामिल है।

कर्तव्य का गैर-पालन भ्रष्टाचार के अंतर्गत आता है क्योंकि इसमें सौंपी गई शक्ति या अधिकार का दुरुपयोग या गैर-उपयोग शामिल होता है।

2. जिम्मेदारियों का उल्लंघन:

जब व्यक्ति अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को पूरा करने में विफल होते हैं, तो इसे भ्रष्टाचार का एक रूप माना जा सकता है क्योंकि यह किसी संगठन या प्रणाली की कार्यप्रणाली और प्रभावशीलता को कमजोर करता है।

Example: एक पुलिस अधिकारी द्वारा रिपोर्ट की गई अपराध की जांच न करना।

3. व्यक्तिगत लाभ और पक्षपात

कर्तव्य का गैर-पालन व्यक्तिगत लाभ या पक्षपात से प्रेरित हो सकता है, जिसमें सार्वजनिक अधिकारी रिश्वत, कमीशन या अन्य लाभों के बदले में जानबूझकर अपनी जिम्मेदारियों की उपेक्षा कर सकते हैं।

भ्रष्टाचार का यह रूप संसाधनों को उनके निर्धारित उद्देश्यों से दूर कर देता है और निष्पक्ष और पारदर्शी शासन को कमजोर करता है।

4. शक्ति का दुरुपयोग

कर्तव्य का गैर-पालन अक्सर शक्ति या अधिकार के दुरुपयोग में शामिल होता है, जहां व्यक्ति व्यक्तिगत हितों को समाज के व्यापक हितों पर प्राथमिकता देते हैं, जो भ्रष्टाचार का अंतिम कारण है।

Example: एक पर्यवेक्षक जो उत्पादन को तेज करने के लिए जानबूझकर सुरक्षा नियमों की अनदेखी करता है।

5. भ्रष्टाचार को सक्षम बनाना

कर्तव्य का गैर-पालन अन्य प्रकार के भ्रष्टाचार के पनपने के अवसर पैदा करता है।

जब सार्वजनिक सेवक अपनी जिम्मेदारियों का पालन करने में विफल होते हैं, तो यह रिश्वतखोरी, धोखाधड़ी, गबन और अन्य भ्रष्ट प्रथाओं के पनपने का मार्ग प्रशस्त करता है।

6. शासन और सार्वजनिक विश्वास पर प्रभाव

कर्तव्य का गैर-पालन शासन प्रणालियों की प्रभावशीलता और वैधता को कमजोर करता है।

जब सार्वजनिक अधिकारी अपने कर्तव्यों की उपेक्षा करते हैं, तो यह सरकार और संस्थानों में सार्वजनिक विश्वास को कमजोर करता है।

7. कई विचारकों द्वारा समर्थित:

मैक्स वेबर (Max Weber) ने नौकरशाही भ्रष्टाचार की अवधारणा पर चर्चा की, जिसमें कर्तव्य का गैर-पालन शामिल है। उन्होंने बताया कि कैसे भ्रष्टाचार अक्षम नौकरशाहियों के रूप में प्रकट हो सकता है जहां अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों की उपेक्षा करते हैं।

महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) का मानना था कि कर्तव्य का गैर-पालन समाज द्वारा व्यक्तियों में रखे गए विश्वास का विश्वासघात था, जो भ्रष्टाचार की जड़ है।

निष्कर्ष

किसी लोक सेवक द्वारा कर्तव्य का गैर-प्रदर्शन (Non-performance of duty) भ्रष्टाचार का एक रूप है क्योंकि इसमें सौंपी गई शक्ति और अधिकार का दुरुपयोग या गैर-उपयोग शामिल होता है।

यह सार्वजनिक विश्वास को कमजोर करता है, सेवा वितरण में बाधा डालता है, और असमानता को बढ़ावा देता है।

कर्तव्य के गैर-प्रदर्शन को संबोधित करने के लिए मजबूत भ्रष्टाचार विरोधी उपायों (anti-corruption measures), जवाबदेही (accountability), और लोक सेवकों के बीच अखंडता (integrity) की संस्कृति को बढ़ावा देने के प्रयासों की आवश्यकता होती है